श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  7.201.51 
अधरोत्तरमेतद् वा लोकानां वा पराभव:।
यदिमौ जीवत: कृष्णौ कालो हि दुरतिक्रम:॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस (आग्नेय) अस्त्र के प्रभाव में कोई परिवर्तन नहीं हुआ अथवा सम्पूर्ण जगत् का नाश होने वाला था, जिससे ये दोनों कृष्ण जीवित बच गए। निश्चय ही काल का उल्लंघन करना अत्यन्त कठिन है ॥51॥
 
There was no change in the effect of this (fiery) weapon or the entire world was about to be destroyed, due to which both these Krishnas were saved alive. Certainly it is very difficult to violate Kaal. 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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