श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  7.201.49 
तं द्रौणिरग्रतो दृष्ट्वा स्थितं कुरुकुलोद्वह।
सन्नकण्ठोऽब्रवीद् वाक्यमभिवाद्य सुदीनवत्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुकुलश्रेष्ठ! महर्षि व्यास को अपने सम्मुख खड़े देखकर द्रोणकुमार का गला आँसुओं से भर आया। उन्होंने अत्यन्त विनीत भाव से उन्हें प्रणाम करके उनसे इस प्रकार पूछा ॥49॥
 
The best man of Kurukula! Seeing Maharishi Vyas standing in front of him, Drona Kumar's throat filled with tears. He bowed to him with utmost humility and asked him thus: 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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