श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.201.48 
तत: स्निग्धाम्बुदाभासं वेदावासमकल्मषम्।
वेदव्यासं सरस्वत्यावासं व्यासं ददर्श ह॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
तभी उन्होंने वहाँ निष्पाप महर्षि व्यास को देखा, जो कोमल मेघ के समान श्याम वर्ण के थे, वेदों और सरस्वती के निवास थे तथा जिन्होंने वेदों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया था।
 
Just then he saw there the sinless Maharishi Vyasa, who was as dark as a soft cloud, the abode of Vedas and Saraswati, and the one who elaborated on the Vedas.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas