Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.201.38-39h: वहाँ हमने एक अद्भुत दृश्य देखा। पांडवों की पूरी अक्षौहिणी उस अस्त्र की शक्ति से इस प्रकार जलकर नष्ट हो गई कि उसे पहचानना असंभव हो गया। | mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राद्भुतमपश्याम कृत्स्नामक्षौहिणीं हताम्॥ ३८॥
अनभिज्ञेयरूपां च प्रदग्धामस्त्रतेजसा।
अनुवाद
वहाँ हमने एक अद्भुत दृश्य देखा। पांडवों की पूरी अक्षौहिणी उस अस्त्र की शक्ति से इस प्रकार जलकर नष्ट हो गई कि उसे पहचानना असंभव हो गया।
There we saw a wonderful sight. The entire Akshauhini of the Pandavas was burnt and destroyed by the power of that weapon in such a way that it became impossible to identify it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥