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mahabharat 7.201.31-32h: भरतनन्दन! जैसे प्रलयकाल में संवर्तक अग्नि सम्पूर्ण प्राणियों को जलाकर भस्म कर देती है, उसी प्रकार वह आग्नेयास्त्र युद्धस्थल में भयभीत पाण्डवों की सेना को जलाने लगा॥31 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  7.201.31-32h 
तत् सैन्यं भयसंविग्नं ददाह युधि भारत॥ ३१॥
युगान्ते सर्वभूतानि संवर्तक इवानल:।
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! जैसे प्रलयकाल में संवर्तक अग्नि सम्पूर्ण प्राणियों को जलाकर भस्म कर देती है, उसी प्रकार वह आग्नेयास्त्र युद्धस्थल में भयभीत पाण्डवों की सेना को जलाने लगा॥31 1/2॥
 
Bharatnandan! Just as the Samvartaka fire burns all living beings to ashes in the time of doomsday, in the same way, that firearm started burning that frightened army of Pandavas in the battlefield. 31 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)