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mahabharat 7.201.29: हे प्रजानाथ! बहुत से हाथी जो डरकर भाग गए थे, वे उसी प्रकार सब दिशाओं में चक्कर लगाने लगे, जैसे वे दावानल से घिर जाने पर सब दिशाओं में चक्कर लगाते थे।   |   mahabharat अध्याय 7.201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.201.29 
अपरे प्रद्रुता नागा भयत्रस्ता विशाम्पते।
भ्रेमुर्दिशोे यथा पूर्वं वने दावाग्निसंवृता:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! बहुत से हाथी जो डरकर भाग गए थे, वे उसी प्रकार सब दिशाओं में चक्कर लगाने लगे, जैसे वे दावानल से घिर जाने पर सब दिशाओं में चक्कर लगाते थे।
 
O Prajanath! Many other elephants who had fled in fear began to circle in all directions in the same manner as they used to circle in all directions when they were surrounded by a forest fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)