श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  7.201.27 
तै: शरैर्द्रोणपुत्रस्य वज्रवेगै: समाहता:।
प्रदग्धा रिपव: पेतुरग्निदग्धा इव द्रुमा:॥ २७॥
 
 
अनुवाद
द्रोणपुत्र के उन वज्र के समान वेगवान बाणों से घायल होकर शत्रु सैनिक आग में जले हुए वृक्षों की भाँति जलकर गिर पड़े।
 
The enemy soldiers, wounded by those arrows of Drona's son which were as fast as thunderbolts, fell down burning like trees burnt in fire.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas