श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.201.25 
जलजानि च सत्त्वानि दह्यमानानि भारत।
न शान्तिमुपजग्मुर्हि तप्यमानैर्जलाशयै:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भारत! जलाशय भी बहुत गर्म हो गए थे, जिससे जलते हुए जलचरों को शांति नहीं मिल रही थी।
 
Bharat! Even the water reservoirs had become very hot due to which the aquatic creatures getting burnt could not find peace. 25.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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