श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.201.23 
भ्रान्तसर्वमहाभूतमावर्तितदिवाकरम्।
त्रैलोक्यमभिसंतप्तं ज्वराविष्टमिवाभवत्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो समस्त महाभूत वृत्ताकार घूम रहे हों। यहाँ तक कि सूर्य भी घूमता हुआ प्रतीत हो रहा था। तीनों लोकों के प्राणी मानो ज्वर से पीड़ित हो रहे हों, व्याकुल हो रहे थे॥23॥
 
It seemed as if all the Mahabhutas were spinning in circles. Even the Sun appeared to be spinning. The beings of the three worlds were distressed as if they were suffering from fever.॥ 23॥
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