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श्लोक 7.201.18  |
ततस्तुमुलमाकाशे शरवर्षमजायत।
पावकार्चि: परीतं तत् पार्थमेवाभिपुप्लुवे॥ १८॥ |
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| अनुवाद |
| तब आकाश से बाणों की भयंकर वर्षा होने लगी और सब ओर से अग्नि की लपटें फैलती हुई अर्जुन पर पड़ने लगीं॥18॥ |
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| Then a fierce shower of arrows began from the sky and the flames of fire spreading from all sides fell upon Arjuna.॥ 18॥ |
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