श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 201: अश्वत्थामाके द्वारा आग्नेयास्त्रके प्रयोगसे एक अक्षौहिणी पाण्डव-सेनाका संहार; श्रीकृष्ण और अर्जुनपर उस अस्त्रका प्रभाव न होनेसे चिन्तित हुए अश्वत्थामाको व्यासजीका शिव और श्रीकृष्णकी महिमा बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.201.13 
तस्मादनर्हमश्लीलमप्रियं द्रौणिमुक्तवान्।
मान्यमाचार्यतनयं रूक्षं कापुरुषं यथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए अर्जुन ने पूज्य आचार्य के पुत्र अश्वत्थामा को कठोर, अप्रिय और अश्लील वचन कहे, जो कठोर वचन सुनने के योग्य नहीं थे ॥13॥
 
That is why Arjuna uttered harsh, unpleasant and obscene words to Ashvatthama, the son of the revered Acharya, who was not worthy of hearing harsh words. ॥13॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas