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श्लोक 7.201.100  |
युद्धं कृत्वा दिनान् पञ्च द्रोणो हत्वा वरूथिनीम्।
ब्रह्मलोकं गतो राजन् ब्राह्मणो वेदपारग:॥ १००॥ |
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| अनुवाद |
| राजन! इस प्रकार वेदों के पारंगत विद्वान द्रोणाचार्य पाँच दिन तक युद्ध करके शत्रु सेना का संहार करके ब्रह्मलोक को चले गए॥100॥ |
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| Rajan! In this way, Dronacharya, an expert scholar of the Vedas, after fighting for five days and killing the enemy army, went to Brahmalok. 100॥ |
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इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि नारायणास्त्रमोक्षपर्वणि व्यासवाक्ये शतरुद्रिये एकाधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २०१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत नारायणास्त्रमोक्षपर्वमें व्यासवाक्य तथा शतरुद्रिय स्तुतिविषयक दो सौ एकवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २०१॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल १०२ १/२ श्लोक हैं।) |
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