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mahabharat 7.200.85: तत्पश्चात् वेगवान अश्वत्थामा ने अपने प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी बाणों द्वारा नीलकमल की माला के समान कान्ति वाले चेदिराजकुमार को बलपूर्वक घायल कर दिया और उसे घोड़ों तथा सारथि सहित मृत्यु के हवाले कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  7.200.85 
युवानमिन्दीवरदामवर्णं
चेदिप्रभुं युवराजं प्रसह्य।
बाणैस्त्वरावान् प्रज्वलिताग्निकल्पै-
र्विद्‍ध्वा प्रादान्मृत्यवे साश्वसूतम्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वेगवान अश्वत्थामा ने अपने प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी बाणों द्वारा नीलकमल की माला के समान कान्ति वाले चेदिराजकुमार को बलपूर्वक घायल कर दिया और उसे घोड़ों तथा सारथि सहित मृत्यु के हवाले कर दिया।
 
Thereafter, the swift Ashvatthama, with his arrows as brilliant as blazing fire, forcefully wounded the young prince of Chedi, who had the radiance like a garland of blue lotuses, and handed him over to death along with his horses and charioteer. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)