Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.200.68-69: कवच के टुकड़े-टुकड़े हो जाने से वीर सात्यकि ऐसे व्याकुल हो गए जैसे अंकुश से घायल हाथी। उनके घावों से अत्यधिक रक्त बह रहा था। दुर्बल और रक्त से लथपथ होकर उन्होंने अपना धनुष-बाण त्याग दिया और रथ के पिछले भाग में बैठ गए। तब सारथि ने उन्हें तुरंत द्रोणपुत्र से हटाकर दूसरे सारथि के पास बैठा दिया। 68-69. | mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कवच के टुकड़े-टुकड़े हो जाने से वीर सात्यकि ऐसे व्याकुल हो गए जैसे अंकुश से घायल हाथी। उनके घावों से अत्यधिक रक्त बह रहा था। दुर्बल और रक्त से लथपथ होकर उन्होंने अपना धनुष-बाण त्याग दिया और रथ के पिछले भाग में बैठ गए। तब सारथि ने उन्हें तुरंत द्रोणपुत्र से हटाकर दूसरे सारथि के पास बैठा दिया। 68-69.
With his armour torn to pieces, the valiant Satyaki was as distressed as an elephant struck by goads. His wounds were bleeding profusely. Weak and covered in blood, he dropped his bow and arrows and sat in the rear of the chariot. The charioteer then immediately removed him from Drona's son to another charioteer. 68-69.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥