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mahabharat 7.200.64: शैणेय! मैं सत्य और तप की शपथ लेता हूँ कि जब तक मैं समस्त पांचालों का वध नहीं कर लूँगा, मुझे कभी शांति नहीं मिलेगी।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  7.200.64 
शपेऽऽत्मनाहं शैनेय सत्येन तपसा तथा।
अहत्वा सर्वपाञ्चालान् यदि शान्तिमहं लभे॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
शैणेय! मैं सत्य और तप की शपथ लेता हूँ कि जब तक मैं समस्त पांचालों का वध नहीं कर लूँगा, मुझे कभी शांति नहीं मिलेगी।
 
Shaineya! I swear by truth and penance that I will never find peace until I kill all the Panchalas. 64.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)