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mahabharat 7.200.63: हे शिनिपौत्र! मैं जानता हूँ कि आचार्य के हत्यारे धृष्टद्युम्न के प्रति तुम्हारा विशेष सहयोग और पक्षपात है; किन्तु तुम मेरे चंगुल में फँसे हुए धृष्टद्युम्न और अपने आपको नहीं बचा सकोगे॥ 63॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.200.63 
शैनेयाभ्युपपत्तिं ते जानाम्याचार्यघातिनि।
न चैनं त्रास्यसि मया ग्रस्तमात्मानमेव च॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
हे शिनिपौत्र! मैं जानता हूँ कि आचार्य के हत्यारे धृष्टद्युम्न के प्रति तुम्हारा विशेष सहयोग और पक्षपात है; किन्तु तुम मेरे चंगुल में फँसे हुए धृष्टद्युम्न और अपने आपको नहीं बचा सकोगे॥ 63॥
 
O grandson of Shini! I know that you have special support and partiality towards Dhrishtadyumna, the killer of Acharya; but you will not be able to save Dhrishtadyumna and yourself who are trapped in my clutches. ॥ 63॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)