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mahabharat 7.200.61: हे शत्रुराज! अश्वत्थामा को पुनः आते देख सात्यकि ने उसे अत्यन्त क्रूर एवं तीखे बाणों से बारंबार बींध डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  7.200.61 
पुनस्तमागतं दृष्ट्वा शैनेयो निशितै: शरै:।
अदारयत् क्रूरतरै: पुन: पुनररिंदम॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुराज! अश्वत्थामा को पुनः आते देख सात्यकि ने उसे अत्यन्त क्रूर एवं तीखे बाणों से बारंबार बींध डाला।
 
O King of enemies! Seeing Ashvatthama coming again, Satyaki pierced him again and again with very cruel and sharp arrows. 61.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)