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mahabharat 7.200.60: महाराज! तब महाबली अश्वत्थामा रथ पर आरूढ़ होकर सात्यकि पर क्रोधित होकर उसे मार डालने की इच्छा से आगे बढ़ा।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  7.200.60 
ततो द्रौणिर्महाराज रथमारुह्य वीर्यवान्।
सात्यकिं प्रतिसंक्रुद्ध: प्रययौ तद्वधेप्सया॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
महाराज! तब महाबली अश्वत्थामा रथ पर आरूढ़ होकर सात्यकि पर क्रोधित होकर उसे मार डालने की इच्छा से आगे बढ़ा।
 
Maharaj! Then the mighty Ashvatthama mounted on the chariot and being angry with Satyaki, advanced forward with the intention of killing him. 60.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)