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mahabharat 7.200.36: राजन! तत्पश्चात् धृष्टद्युम्न ने अग्नि के समान तेजस्वी तिरसठ बाणों से द्रोणपुत्र को घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  7.200.36 
धृष्टद्युम्नस्ततो राजन् ज्वलन्तमिव पावकम्।
द्रोणपुत्रं त्रिषष्ट्या तु राजन् विव्याध पत्रिणाम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजन! तत्पश्चात् धृष्टद्युम्न ने अग्नि के समान तेजस्वी तिरसठ बाणों से द्रोणपुत्र को घायल कर दिया।
 
Rajan! Thereafter, Dhrishtadyumna pierced Drona's son with sixty-three arrows, as bright as blazing fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)