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mahabharat 7.200.33: क्योंकि उन्होंने देखा था कि नारायणास्त्र के प्रभाव से मुक्त पांडव युद्ध के लिए उपस्थित थे और युद्धभूमि में विचरण कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.200.33 
दृष्ट्वा पार्थांश्च संग्रामे युद्धाय समुपस्थितान्।
नारायणास्त्रनिर्मुक्तांश्चरत: पृतनामुखे॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि उन्होंने देखा था कि नारायणास्त्र के प्रभाव से मुक्त पांडव युद्ध के लिए उपस्थित थे और युद्धभूमि में विचरण कर रहे थे।
 
Because he had seen that the Pandavas, freed from the effects of the Narayanastra, were present for the battle and were roaming about the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)