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mahabharat 7.200.23: अस्त्र के शांत हो जाने पर जो पाण्डव सेना मृत्यु से बच गई थी, वह पुनः आपके पुत्रों का नाश करने के लिए हर्ष से भर गई ॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  7.200.23 
हतशेषं बलं तत् तु पाण्डवानामतिष्ठत।
अस्त्रव्युपरमाद्‍धृष्टं तव पुत्रजिघांसया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
अस्त्र के शांत हो जाने पर जो पाण्डव सेना मृत्यु से बच गई थी, वह पुनः आपके पुत्रों का नाश करने के लिए हर्ष से भर गई ॥ 23॥
 
The Pandava army which had escaped death, after the weapon had been silenced, was once again filled with joy to destroy your sons. ॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)