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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 127-128h
 
 
श्लोक  7.200.127-128h 
ततोऽश्वा: प्राद्रवंस्तूर्णं मोहिते रथसारथौ॥ १२७॥
भीमसेनस्य राजेन्द्र पश्यतां सर्वधन्विनाम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! सारथि के मूर्छित हो जाने पर भीमसेन के घोड़े तुरन्त ही समस्त धनुर्धरों के सामने से भाग निकले।
 
King! When the charioteer fell unconscious, Bhimasena's horses immediately fled from there in front of all the archers. 127 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)