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mahabharat 7.200.125-126h: महाराज! तब अश्वत्थामा ने मुड़े हुए सिरे वाले बाण से भीमसेन के सारथि के मस्तक को छेद दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 200: श्रीकृष्णका भीमसेनको रथसे उतारकर नारायणास्त्रको शान्त करना, अश्वत्थामाका उसके पुन: प्रयोगमें अपनी असमर्थता बताना तथा अश्वत्थामाद्वारा धृष्टद्युम्नकी पराजय, सात्यकिका दुर्योधन, कृपाचार्य, कृतवर्मा, कर्ण और वृषसेन—इन छ: महारथियोंको भगा देना फिर अश्वत्थामाद्वारा मालव, पौरव और चेदिदेशके युवराजका वध एवं भीम और अश्वत्थामाका घोर युद्ध तथा पाण्डव-सेनाका पलायन  »  श्लोक 125-126h
 
 
श्लोक  7.200.125-126h 
ततो द्रौणिर्महाराज भीमसेनस्य सारथिम्॥ १२५॥
ललाटे दारयामास शरेणानतपर्वणा।
 
 
अनुवाद
महाराज! तब अश्वत्थामा ने मुड़े हुए सिरे वाले बाण से भीमसेन के सारथि के मस्तक को छेद दिया।
 
Maharaj! Then Ashvatthama pierced the forehead of Bhimasena's charioteer with an arrow having a bent tip. 125 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)