श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 2: कर्णकी रणयात्रा  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  7.2.32 
तं चेन्मृत्यु: सर्वहरोऽभिरक्षेत्
सदाप्रमत्त: समरे किरीटिनम्।
तथापि हन्तास्मि समेत्य संख्ये
यास्यामि वा भीष्मपथा यमाय॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
फिर भी मैं युद्धभूमि में सावधानी से युद्ध करूँगा और यदि सर्वनाश करने वाला स्वयं मृत्यु भी आकर अर्जुन की रक्षा करे, तो भी मैं युद्धभूमि में उसका सामना करके उसे मार डालूँगा अथवा स्वयं भीष्म के मार्ग से यमराज से मिलने जाऊँगा॥ 32॥
 
Nevertheless I will fight cautiously on the battlefield and even if the all-destroying Death himself comes and protects Arjuna, I will either face him on the battlefield and kill him or I will myself go to meet Yamaraja via Bhishma's path.॥ 32॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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