| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 2: कर्णकी रणयात्रा » श्लोक 30 |
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| | | | श्लोक 7.2.30  | प्रयाहि सूताशु यत: किरीटी
वृकोदरो धर्मसुतो यमौ च।
तान् वा हनिष्यामि समेत्य संख्ये
भीष्माय गच्छामि हतो द्विषद्भि:॥ ३०॥ | | | | | | अनुवाद | | सूत! यह सब करके तुम शीघ्र ही अपना रथ लेकर उस स्थान पर जाओ जहाँ किरीटधारी अर्जुन, भीमसेन, धर्मपुत्र युधिष्ठिर और नकुल-सहदेव खड़े हैं। वहाँ मैं रणभूमि में उनके साथ युद्ध करके या तो उनका वध कर दूँगा अथवा स्वयं शत्रुओं द्वारा मारा जाकर भीष्म के पास जाऊँगा॥ 30॥ | | | | Suta! After doing all this, you quickly take your chariot and go to the place where crown-wearing Arjun, Bhimasena, Dharmaputra Yudhishthira and Nakula-Sahadeva are standing. There, I will fight with them on the battlefield and either kill them or I will myself be killed by the enemies and go to Bhishma.॥ 30॥ | | ✨ ai-generated | | |
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