श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 2: कर्णकी रणयात्रा  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.2.28 
चित्राणि चापानि च वेगवन्ति
ज्याश्चोत्तमा: संनहनोपपन्ना:।
तूणांश्च पूर्णान् महत: शराणा-
मासाद्य गात्रावरणानि चैव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
‘अपने अद्वितीय एवं शक्तिशाली धनुष, उत्तम प्रत्यंचा, कवच, बाणों से भरे विशाल तरकश और शरीर के आवरण लेकर शीघ्र तैयार हो जाओ।॥ 28॥
 
‘Quickly get ready with your unique and powerful bow, excellent bowstring, armour, huge quiver filled with arrows and body coverings.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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