श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 2: कर्णकी रणयात्रा  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.2.25 
इमां रौक्मीं नागकक्ष्यां विचित्रां
ध्वजं चित्रं दिव्यमिन्दीवराङ्कम्।
श्लक्ष्णैर्वस्त्रैर्विप्रमृज्यानयन्तु
चित्रां मालां चारुबद्धां सलाजाम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हाथी को बाँधने वाली अनोखी सुवर्णमयी रस्सी और कमल के चिह्न वाली दिव्य एवं अद्भुत ध्वजा को स्वच्छ एवं सुन्दर वस्त्र से पोंछकर ले आओ। इसके अतिरिक्त सुन्दर ढंग से गूँथी हुई अनोखी माला और मुरमुरे आदि शुभ वस्तुएँ भी भेंट करो॥ 25॥
 
Wipe the unique golden rope used for tying the elephant and the divine and wonderful flag bearing the symbol of lotus with clean and beautiful clothes and bring it. Besides this, present auspicious items like a unique garland woven in a beautiful manner and puffed rice etc.॥ 25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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