| श्री महाभारत » पर्व 7: द्रोण पर्व » अध्याय 2: कर्णकी रणयात्रा » श्लोक 24 |
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| | | | श्लोक 7.2.24  | उपासङ्गान् षोडश योजयन्तु
धनूंषि दिव्यानि तथाऽऽहरन्तु।
असींश्च शक्तीश्च गदाश्च गुर्वी:
शङ्खं च जाम्बूनदचित्रनालम्॥ २४॥ | | | | | | अनुवाद | | मेरे सेवक बाणों से भरे सोलह तरकश लेकर आएँ, दिव्य धनुष लेकर आएँ, बहुत-सी तलवारें, भाले, भारी गदाएँ लेकर आएँ और सोने से जड़ित विचित्र नाल वाला शंख भी लेकर आएँ॥ 24॥ | | | | ‘My servants should bring sixteen quivers full of arrows, bring the divine bows, bring many swords, spears, heavy maces and also bring the conch with a strange pipe studded with gold.॥ 24॥ | | ✨ ai-generated | | |
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