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mahabharat 7.199.5-6: कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ने धर्म का वेश धारण करके युद्धप्रिय आचार्य से कहा था कि, "आप अपने शस्त्र त्याग दीजिए" और उनसे शस्त्र रखवा दिए थे; अतः मैं उनके देखते ही उनकी सारी सेना को भगा दूँगा और उनके सब सैनिकों को भगा देने के पश्चात् उस दुष्ट पांचालपुत्र का वध करूँगा।   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  7.199.5-6 
यस्माद् युध्यन्तमाचार्यं धर्मकञ्चुकमास्थित:।
मुञ्च शस्त्रमिति प्राह कुन्तीपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ५॥
तस्मात् सम्पश्यतस्तस्य द्रावयिष्यामि वाहिनीम्।
विद्राव्य सर्वान् हन्तास्मि जाल्मं पाञ्चाल्यमेव तु॥ ६॥
 
 
अनुवाद
कुंतीपुत्र युधिष्ठिर ने धर्म का वेश धारण करके युद्धप्रिय आचार्य से कहा था कि, "आप अपने शस्त्र त्याग दीजिए" और उनसे शस्त्र रखवा दिए थे; अतः मैं उनके देखते ही उनकी सारी सेना को भगा दूँगा और उनके सब सैनिकों को भगा देने के पश्चात् उस दुष्ट पांचालपुत्र का वध करूँगा।
 
Kunti's son Yudhishthira, wearing the robe of Dharma, had said to the war-loving Acharya, "Give up your weapons" and had him put down his weapons; therefore, I will drive away his entire army before his very eyes and after driving away all his soldiers, I will kill that wicked son of Panchala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)