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mahabharat 7.199.33: जब अर्जुन के घोड़े थक गए थे और धृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन अर्जुन को मारने के इरादे से उन पर आक्रमण कर रहा था, तब जिसने दिव्य कवच से उनकी और सिंधुराज की रक्षा की थी।   |   mahabharat अध्याय 7.199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 199: अश्वत्थामाके द्वारा नारायणास्त्रका प्रयोग, राजा युधिष्ठिरका खेद, भगवान् श्रीकृष्णके बताये हुए उपायसे सैनिकोंकी रक्षा, भीमसेनका वीरोचित उद्‍गार और उनपर उस अस्त्रका प्रबल आक्रमण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  7.199.33 
जिघांसुर्धार्तराष्ट्रश्च श्रान्तेष्वश्वेषु फाल्गुनम्।
कवचेन तथा गुप्तो रक्षार्थं सैन्धवस्य च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब अर्जुन के घोड़े थक गए थे और धृतराष्ट्र पुत्र दुर्योधन अर्जुन को मारने के इरादे से उन पर आक्रमण कर रहा था, तब जिसने दिव्य कवच से उनकी और सिंधुराज की रक्षा की थी।
 
When Arjuna's horses were tired and Dhritarashtra's son Duryodhana was attacking Arjuna with the intention of killing him, then the one who protected him and the Sindhuraj with a divine armour.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)