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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 196: कौरव-सेनाका सिंहनाद सुनकर युधिष्ठिरका अर्जुनसे कारण पूछना और अर्जुनके द्वारा अश्वत्थामाके क्रोध एवं गुरुहत्याके भीषण परिणामका वर्णन
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श्लोक 2
श्लोक
7.196.2
चचाल पृथिवी चापि चुक्षुभे च महोदधि:।
प्रतिस्रोत: प्रवृत्ताश्च गन्तुं तत्र समुद्रगा:॥ २॥
अनुवाद
पृथ्वी काँप उठी, समुद्र में ज्वार-भाटा आ गया और समुद्र में मिलने वाली बड़ी-बड़ी नदियाँ अपने प्रवाह की विपरीत दिशा में बहने लगीं॥2॥
The earth trembled, the seas became high tide, and the large rivers flowing into the sea began flowing in the opposite direction of their current.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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