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mahabharat 7.195.6-7h: यदि युद्ध में लड़ने वाला कोई योद्धा न्यायपूर्वक मारा जाता है, तो यह दुःख का कारण नहीं है, क्योंकि ब्राह्मणों ने युद्ध का यह परिणाम देखा है।   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  7.195.6-7h 
न्यायवृत्तो वधो यस्तु संग्रामे युध्यतो भवेत्॥ ६॥
न स दु:खाय भवति तथा दृष्टो हि स द्विजै:।
 
 
अनुवाद
यदि युद्ध में लड़ने वाला कोई योद्धा न्यायपूर्वक मारा जाता है, तो यह दुःख का कारण नहीं है, क्योंकि ब्राह्मणों ने युद्ध का यह परिणाम देखा है।
 
If a warrior fighting in a battle is killed in a just manner, then it is not a cause for sorrow, because the Brahmins have seen this result of war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)