Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.195.5-6h: मैंने धर्मपुत्र युधिष्ठिर के क्रूर और नीच कर्मों के बारे में सुना है। हे राजन! युद्ध में भाग लेने वालों की विजय या पराजय अवश्य होती है। किन्तु युद्ध में वध करना परम प्रशंसनीय है।' | mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनार्यं सुनृशंसं च धर्मपुत्रस्य मे श्रुतम्।
युद्धेष्वपि प्रवृत्तानां ध्रुवं जयपराजयौ॥ ५॥
द्वयमेतद् भवेद् राजन् वधस्तत्र प्रशस्यते।
अनुवाद
मैंने धर्मपुत्र युधिष्ठिर के क्रूर और नीच कर्मों के बारे में सुना है। हे राजन! युद्ध में भाग लेने वालों की विजय या पराजय अवश्य होती है। किन्तु युद्ध में वध करना परम प्रशंसनीय है।'
‘I have heard of the cruel and despicable deeds of Yudhishthira, the son of Dharma. O King! Those who engage in war are sure to achieve victory or defeat. But killing in war is highly praised. 5 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥