vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य
»
श्लोक 44
श्लोक
7.195.44
सोऽहं नारायणास्त्रेण महता शत्रुतापन:।
शत्रून् विध्वंसयिष्यामि कदर्थीकृत्य पाण्डवान्॥ ४४॥
अनुवाद
इस प्रकार शत्रुओं को पीड़ा पहुँचाने वाले महान नारायणास्त्र का प्रयोग करके मैं पाण्डवों को पीड़ा पहुँचाते हुए अपने समस्त शत्रुओं का नाश कर दूँगा।
Thus, by using the great Narayanastra, which causes torment to the enemies, I will destroy all my enemies while inflicting pain on the Pandavas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×