श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  7.195.26 
भृशमिष्वसनादद्य मत्प्रयुक्ता महाहवे।
दर्शयन्त: शरा वीर्यं प्रमथिष्यन्ति पाण्डवान्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
आज इस महायुद्ध में मेरे द्वारा छोड़े गए धनुष के बाण मेरे अपार पराक्रम का परिचय देते हुए पाण्डव योद्धाओं को मथ डालेंगे॥ 26॥
 
Today in this great war the arrows shot by me from my bow will churn the Pandava warriors, demonstrating my immense valour.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)