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mahabharat 7.195.16: मैं युद्धभूमि में पापी धृष्टद्युम्न को किसी भी प्रकार से, चाहे वह हल्का हो या गंभीर, अवश्य मार डालूँगा।   |   mahabharat अध्याय 7.195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 195: अश्वत्थामाके क्रोधपूर्ण उद्‍गार और उसके द्वारा नारायणास्त्रका प्राकट्य  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  7.195.16 
धृष्टद्युम्नं च समरे हन्ताहं पापकारिणम्।
कर्मणा येन तेनेह मृदुना दारुणेन च॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्धभूमि में पापी धृष्टद्युम्न को किसी भी प्रकार से, चाहे वह हल्का हो या गंभीर, अवश्य मार डालूँगा।
 
I shall certainly kill the sinful Dhrishtadyumna on the battlefield by any action, be it mild or severe.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)