Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.194.11-12: जब अश्वत्थामा युद्धभूमि में बाणों की वर्षा करने लगता है, तब पृथ्वी भी अत्यंत व्याकुल हो जाती है। वह वीर एवं धर्मात्मा योद्धा युद्ध में कभी व्याकुल नहीं होता। वह वेदों का अध्ययन पूर्ण करके स्नातक बन चुका है। ब्रह्मचर्य की अवधि पूर्ण करके भी वह स्नातक बन चुका है और धनुर्वेद का भी पारंगत विद्वान है। उसे समुद्र और दशरथपुत्र श्रीराम के समान कोई विचलित नहीं कर सकता। | mahabharat अध्याय 7.194: धृतराष्ट्रका प्रश्न । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्यता येन संग्रामे धरण्यभिनिपीडिता।
यो न व्यथति संग्रामे वीर: सत्यपराक्रम:॥ ११॥
वेदस्नातो व्रतस्नातो धनुर्वेदे च पारग:।
महोदधिरिवाक्षोभ्यो रामो दाशरथिर्यथा॥ १२॥
अनुवाद
जब अश्वत्थामा युद्धभूमि में बाणों की वर्षा करने लगता है, तब पृथ्वी भी अत्यंत व्याकुल हो जाती है। वह वीर एवं धर्मात्मा योद्धा युद्ध में कभी व्याकुल नहीं होता। वह वेदों का अध्ययन पूर्ण करके स्नातक बन चुका है। ब्रह्मचर्य की अवधि पूर्ण करके भी वह स्नातक बन चुका है और धनुर्वेद का भी पारंगत विद्वान है। उसे समुद्र और दशरथपुत्र श्रीराम के समान कोई विचलित नहीं कर सकता।
When Ashwatthama starts raining arrows on the battlefield, even the earth gets extremely distressed. That brave and virtuous warrior is never distressed in battle. He has become a graduate by completing the study of Vedas. He has also become a graduate by completing the period of celibacy and is also an expert scholar of Dhanurveda. No one can disturb him like the ocean and Dasharatha's son Shri Ram.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥