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mahabharat 7.193.63: तब द्रुपद के पुत्र ने सभी वीर योद्धाओं की पुकार अनसुनी करते हुए अपने बाएं हाथ से अपने गुरु के केश पकड़ लिए और दाहिने हाथ से उनका सिर काट दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  7.193.63 
ततोऽस्य केशान् सव्येन गृहीत्वा पाणिना तदा।
पार्षत: क्रोशमानानां वीराणामच्छिनच्छिर:॥ ६३॥
 
 
अनुवाद
तब द्रुपद के पुत्र ने सभी वीर योद्धाओं की पुकार अनसुनी करते हुए अपने बाएं हाथ से अपने गुरु के केश पकड़ लिए और दाहिने हाथ से उनका सिर काट दिया।
 
Then the son of Drupada, ignoring the cries of all the brave warriors, caught hold of the hair of his teacher with his left hand and cut off his head with his right hand.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)