vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 7: द्रोण पर्व
»
अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना
»
श्लोक 61
श्लोक
7.193.61
तं दॄष्ट्वा परमोद्विग्नं शोकातुरमचेतसम्।
पांचालराजस्य सुत: क्रूरकर्मा समाद्रवत्॥ ६१॥
अनुवाद
उसे अत्यन्त व्यथित, शोकग्रस्त एवं अचेत देखकर पांचालराज का क्रूर पुत्र धृष्टद्युम्न उसकी ओर दौड़ा।
Seeing him extremely distressed, grief-stricken and unconscious, Dhrishtadyumna, the cruel son of the King of Panchala, ran towards him. 61.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×