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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना
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श्लोक 52
श्लोक
7.193.52
एतन्नारोचयद् वाक्यं कुन्तीपुत्रो धनंजय:।
अरोचयंस्तु सर्वेऽन्ये कृच्छ्रेण तु युधिष्ठिर:॥ ५२॥
अनुवाद
कुंतीकुमार अर्जुन को यह बात पसंद नहीं आई। लेकिन बाकी सभी को यह बात पसंद आई। युधिष्ठिर बड़ी मुश्किल से इस बात पर सहमत हुए। 52.
Kuntikumar Arjun did not like this. But everyone else liked it. Yudhishthira agreed to this with great difficulty. 52.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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