श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  7.193.48 
तान् दृष्ट्वा पीडितान् बाणैर्द्रोणेन मधुसूदन:।
जयैषी पाण्डुपुत्राणामिदं वचनमब्रवीत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य के बाणों से उन सबको पीड़ित देखकर पाण्डवों की विजय चाहने वाले मधुसूदन भगवान श्रीकृष्ण ने इस प्रकार कहा-॥48॥
 
Seeing all of them suffering from the arrows of Dronacharya, Madhusudan Lord Shri Krishna, who wanted the victory of Pandavas, said thus -॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)