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ते दह्यमाना द्रोणेन सूर्येणेव विराजता।
दग्धवीर्या निरुत्साहा बभूवुर्गतचेतस:॥ ४७॥
अनुवाद
सूर्य के समान तेजस्वी द्रोणाचार्य द्वारा जलाए जाने से पांचालों का बल और पराक्रम भी नष्ट हो गया। वे हतोत्साहित होकर अचेत हो गए।
Being burnt by Dronacharya who was as radiant as the bright sun, the strength and valour of the Panchalas were also burnt. They were demoralised and became unconscious.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥