श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  7.193.41 
पाण्डवा: केकया मत्स्या: पञ्चालाश्च विशेषत:।
संख्ये द्रोणरथं प्राप्य व्यनशन् कालचोदिता:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
पाण्डव, केकय, मत्स्य और विशेषतः पांचाल योद्धा काल से प्रेरित होकर द्रोणाचार्य के रथ के पास आये और युद्ध में नष्ट हो गये ॥ 41॥
 
The Pandavas, the Kekayas, the Matsyas and especially the Panchala warriors, inspired by time, came near Dronacharya's chariot and were destroyed in the war. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)