श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.193.37 
कृप उवाच
वयं द्रोणं पुरस्कृत्य पृथिव्यां प्रवरं रथम्।
प्रावर्तयाम संग्रामं पञ्चालैरेव केवलम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
कृपाचार्य बोले - बेटा! हमने संसार के सर्वश्रेष्ठ योद्धा आचार्य द्रोण को आगे करके ही पांचालों के साथ युद्ध आरम्भ किया था।
 
Krupacharya said - Son! We had started the war with the Panchalas only by putting forward the world's best warrior Acharya Drona. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)