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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना
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श्लोक 33
श्लोक
7.193.33
तत्तु दुर्योधन: श्रुत्वा द्रोणपुत्रस्य भाषितम्।
घोरमप्रियमाख्यातुं नाशक्नोत् पार्थिवर्षभ:॥ ३३॥
अनुवाद
द्रोणपुत्र अश्वत्थामा के मुख से ये शब्द सुनकर महाबली राजा दुर्योधन स्वयं भी उन्हें यह अत्यंत अप्रिय समाचार नहीं बता सका।
Upon hearing these words from Drona's son Ashvatthama, the great king Duryodhana could not himself convey this extremely unpleasant news to him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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