श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  7.193.29 
किमियं द्रवते सेना त्रस्तरूपेव भारत।
द्रवमाणां च राजेन्द्र नावस्थापयसे रणे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! यह सेना क्यों डरकर भाग रही है? राजेन्द्र! आप युद्ध में इस भागती हुई सेना को रोकने का प्रयत्न क्यों नहीं करते?॥29॥
 
Bharatanandan! Why is this army running away in fear? Rajendra! Why don't you try to stop this running army in the battle?॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)