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mahabharat 7.193.22: उन सबके बाल बिखरे हुए थे। वे गिरते-पड़ते भाग रहे थे। दो सैनिक एक साथ या एक ही दिशा में नहीं दौड़ सकते थे। उन्हें विश्वास हो गया था कि अब यह सेना नहीं बचेगी; इसीलिए उनका उत्साह और बल नष्ट हो गया था॥ 22॥   |   mahabharat अध्याय 7.193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  7.193.22 
प्रकीर्णकेशा विध्वस्ता न द्वावेकत्र धावत:।
नेदमस्तीति मन्वाना हतोत्साहा हतौजस:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
उन सबके बाल बिखरे हुए थे। वे गिरते-पड़ते भाग रहे थे। दो सैनिक एक साथ या एक ही दिशा में नहीं दौड़ सकते थे। उन्हें विश्वास हो गया था कि अब यह सेना नहीं बचेगी; इसीलिए उनका उत्साह और बल नष्ट हो गया था॥ 22॥
 
All of them had dishevelled hair. They were running, falling down. Two soldiers would not run together or in the same direction. They were convinced that now this army will not survive; that is why their enthusiasm and strength were destroyed.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)