श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 193: कौरव-सैनिकों तथा सेनापतियोंका भागना, अश्वत्थामाके पूछनेपर कृपाचार्यका उसे द्रोणवधका वृत्तान्त सुनाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.193.2 
उदीर्णांश्च परान् दृष्ट्वा कम्पमाना: पुन: पुन:।
अश्रुपूर्णेक्षणास्त्रस्ता दीनास्त्वासन् विशाम्पते॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे प्रजानाथ! शत्रुओं को विजय प्राप्त होते देख वे भयभीत और दुःखी हो गए और बार-बार काँपने लगे तथा आँसू बहाने लगे॥2॥
 
Prajanath! Seeing his enemies gaining victory, he became fearful and miserable and started trembling repeatedly and started shedding tears.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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