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mahabharat 7.192.28: धृषद्युम्न! यहाँ तुम्हारे अतिरिक्त कोई दूसरा ऐसा नहीं है जो आचार्य से युद्ध करने का साहस कर सके। अतः तुम्हें सबसे पहले उन्हें शीघ्रातिशीघ्र मार डालने का प्रयत्न करना चाहिए। यह सम्पूर्ण उत्तरदायित्व तुम पर डाला गया है।'   |   mahabharat अध्याय 7.192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 192: उभयपक्षके श्रेष्ठ महारथियोंका परस्पर युद्ध, धृष्टद्युम्नका आक्रमण, द्रोणाचार्यका अस्त्र त्यागकर योगधारणाके द्वारा ब्रह्मलोक-गमन और धृष्टद्युम्नद्वारा उनके मस्तकका उच्छेद  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  7.192.28 
न त्वदन्य इहाचार्यं योद्‍धुमुत्सहते पुमान्।
त्वरस्व प्राग् वधायैव त्वयि भार: समाहित:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धृषद्युम्न! यहाँ तुम्हारे अतिरिक्त कोई दूसरा ऐसा नहीं है जो आचार्य से युद्ध करने का साहस कर सके। अतः तुम्हें सबसे पहले उन्हें शीघ्रातिशीघ्र मार डालने का प्रयत्न करना चाहिए। यह सम्पूर्ण उत्तरदायित्व तुम पर डाला गया है।'
 
Dhrishadyumna! There is no other person here except you who can dare to fight with Acharya. Therefore, you should first try to kill him as quickly as possible. This entire responsibility has been placed on you.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)