यादृशानि हि रूपाणि दृश्यन्तेऽस्य महारणे।
अद्य द्रोणं रणे क्रुद्धो घातयिष्यति पार्षत:॥ १४॥
ते यूयं सहिता भूत्वा युध्यध्वं कुम्भसम्भवम्।
अनुवाद
आज महायुद्ध में ऐसे-ऐसे रूप दिखाई दे रहे हैं, जिनसे ज्ञात होता है कि युद्धभूमि में कुपित होकर धृष्टद्युम्न द्रोणाचार्य का सब प्रकार से संहार कर देंगे। अतः तुम सब लोग एक होकर कुम्भ-जनित द्रोणाचार्य से युद्ध करो।॥14 1/2॥
‘Today in the great war, such forms are seen, from which it is known that Dhrishtadyumna, enraged on the battlefield, will kill Dronacharya in every way. Therefore, all of you should unite and fight with Kumbha-born Dronacharya.'॥ 14 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥